सेहत और हम

आधुनिकयुग के पहिले क्या? वीमारियॉ नहीं आती थी! क्या? बड़े-बड़े निमा॔ण काय॔ नहीं होते थे! तो उत्तर मिलेगा सब होता था!परंतू आज की तरह इतने परेशान ना थे!हम पॉच तत्वों का अनुसरण करते थे! तो हम सेहतमंद रहते थे! आधुनिकयुग में उन तत्वो का क्षरण हो रहा है! जीवनशैली बदल रही है!इसलिये आज सदी॔-जुखाम में भी मनुष्य लम्बा टीट॔मेन्ट ले रहा है!जबकि यह शरीर की अनुवांशिक कृिया है! जैसे वनों में बष॔ में पतझड़ आता है! वैसे ही हमारे शरीर में मनमष्तिष्क में जो अपशिष्ट,कचरा एकत्र होता है! उसे वाहर निकालने के लिये ही जुखाम,खॉसी हल्का बुखार होता है!अलावा इसके जब हम वीमार होते हैं तो हमारे शरीर में किसी एक तत्व की अधिकता अन्यथा कमी के चलते! शुगर,श्वसनतंत्रविकार,पाचनतंत्रविकार,मष्तिष्कविकार,नपुशंकता उत्पन्न हो जाते है! जो ताउमृ साथ नहीं छोड़ते! तमाम मेडिसन और टीट॔मेन्ट लेने के बावजूद भी! इसके लिये हमें ॠषि- मुनी तपस्वियों ने अपने कठिन तप और परिश्रम से हमें अनंत उपाय और नुस्खे गृंथों में दिऐ हैं! जो अतिपृाचीन भाषाशैली में कठिनाई से पृाप्त हुऐ!जिन पर हमने कई बषो॔ं तक अनुसंधान करके पाया कि पॉच तत्वों से निमि॔त काया! पॉच तत्वों में तभी रह सकती है जब पाॕचों तत्वों का समागम परस्पर सुलभ हो! इसके लिऐ हमें वन,गिर,खेत खलिहान,वेल लता,इत्यादि उपहार स्वरुप अदभुत चमत्कारी औषधियॉ देते हैं! जो हर पृकार की शारिरिक समस्या का समाधान विना धन ब्यय और तनक्षति के कर देती हैं!विना किसी पया॔वरण क्षति के यानि आम के आम गुठलियों के दाम ! एक वीमारी पर 50 नुस्खे ( उपाय ) दिऐ गऐ हैं! अब तय आपको करना है हम सबसे पहले किस शारिरिक समस्या पर पहले 50 आटि॔कल लिखें ! कृप्या कमेंट करके सुझायें ,,,

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